उत्तराखंड में नौकरशाहों पर एक बार फिर जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाने का आरोप लगा है. खास बात है कि पहले भी इस तरह के आरोप लगाए जा चुके हैं और इन मामलों पर आदेश के जरिए चेतावनी भी दी जा चुकी है. लेकिन बावजूद इसके अफसर आदेशों की परवाह नहीं कर रहे हैं.
राज्य में ऐसा कई बार हो चुका है, जब नौकरशाही के लापरवाह रवैये पर विधानसभा अध्यक्ष को सदन से निर्देश जारी करने पड़े हैं. कई बार तो कड़ी चेतावनी भी दी जा चुकी है, जिसमें अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल का ख्याल रखने की भी बात कही गई है. लेकिन कुछ समय तक इसको लेकर चर्चा होने के बाद हालात फिर जस के तस हो जाते हैं.
फिलहाल चर्चा मुख्य सचिव आनंद वर्धन के उस पत्र की हो रही है, जिसमें उन्होंने शासन के सभी अधिकारियों को पत्र लिखते हुए जनप्रतिनिधियों के विशेषाधिकार का ख्याल रखने की बात कही है. इसमें स्पष्ट कहा गया है कि पूर्व में भी उनके द्वारा इसी तरह के आदेश जारी किए गए, लेकिन उसके बावजूद विधानसभा सदस्यों के विशेषाधिकार हनन को लेकर मामले सामने आए हैं.

इस बार विधानसभा के प्रभारी सचिव हेमचंद पंत ने यह पत्र लिखा है, जिसमें मुख्य सचिव आनंद वर्धन को विशेषाधिकार समिति की बैठक के दौरान हुई चर्चा की जानकारी देते हुए बताया गया कि, ऐसे कई प्रकरण सामने आ रहे हैं जिसमें अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन नहीं उठाई जाने और उन्हें सरकारी कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं किए जाने की बात सामने आई है. इतना ही नहीं, शासन द्वारा समय पर प्रेषित प्रकरणों के उत्तर भी समिति को समय से उपलब्ध नहीं कराई जा रहे हैं.
