आम जनता की गाड़ियों की अगर सड़कों पर बिना दस्तावेज या फिर वाहन से संबंधित दस्तावेज की वैलिड डेट खत्म हो जाती है, तो पुलिस तुरंत चालानी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटती है. लेकिन आरटीओ के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जो पुलिस आम जनता की गाड़ियों का चालान करती है, उनकी गाड़ियों के ही दस्तावेज पूरे नहीं हैं. पुलिस की गाड़ियां नियमों का उल्लंघन करते हुए सड़क पर दौड़ रही हैं.
परिवहन विभाग के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पुलिस विभाग की गाड़ियां, जो सड़कों पर दौड़ रही हैं, उनका प्रदूषण सर्टिफिकेट खत्म हो चुका है. साथ ही अन्य विभागों की दौड़ रही गाड़ियों का प्रदूषण प्रमाण पत्र भी खत्म हो चुका है. अब परिवहन विभाग सभी विभागों को नोटिस भेज रहा है. अगर प्रदूषण प्रमाण पत्र एक हफ्ते के भीतर नहीं बनवाते हैं, तो ऐसे सभी वाहनों का चालान कर दिया जाएगा.
दरअसल, परिवहन विभाग ने व्हीकल सॉफ्टवेयर में आंकड़ों के अनुसार सरकारी गाड़ियों का डेटा चेक किया. उसमें देखा गया कि लगभग 731 सरकारी गाड़ियां (दोपहिया और भार वाहन) ऐसे हैं, जिनके प्रदूषण प्रमाण पत्र वैध प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं.

इस पूरे मामले पर चौंकाने वाला मामला ये सामने आया है, कि जब पुलिस की गाड़ियों के दस्तावेजों को ऑनलाइन चेक किया, तो सीओ सिटी और एसपी देहात की सड़क पर दौड़ने वाली गाड़ियों का प्रदूषण प्रमाण पत्र भी खत्म होना पाया गया है. इसके बावजूद गाड़ियां सड़कों पर दौड़ रही हैं.
दूसरे और उसके बाद प्रत्येक अपराध पर 5000 रुपये का समन शुल्क और ड्राइविंग लाइसेंस 3 माह के लिए निलंबित किया जाएगा. इसी क्रम में नियम 116 के तहत वाहन स्वामी की जिम्मेदारी है कि यदि वाहन स्वामी 7 दिन के भीतर नियमों का पालन नहीं करता है तो उस पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
आरटीओ संदीप सैनी ने बताया कि एक दिन पहले आरटीओ विभाग में लगी गाड़ियों के व्हीकल सॉफ्टवेयर में चेक किया तो एआरटीओ की गाड़ी का रोड टैक्स जमा नहीं था. जिसके बाद गाड़ी का चालान किया गया था. उसके बाद परिवहन विभाग ने व्हीकल सॉफ्टवेयर में अन्य सरकारी गाड़ियों का डेटा चेक किया गया. जिसमें देखा गया लगभग 731 सरकारी गाड़ियों (दो पहिया और भार वाहन) के प्रदूषण प्रमाण पत्र वैध प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं. इस सभी विभागों को नोटिस भेजा जा रहा है.
आरटीओ द्वारा उन विभागों को कहा गया है कि जो वाहन, लिस्ट में संचालन योग्य है और संचालित हो रहे हैं, उनका प्रदूषण प्रमाण पत्र एक हफ्ते के भीतर बनवा लें. अगर नहीं बनवाते हैं तो ऐसे सभी वाहनों का चालान कर दिया जाएगा. जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी.