केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में आने वाले वक्त में इंसाफ के लिए किसी को तारीख पर तारीख नहीं मिलेगी। जल्द ही क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम पूरी तरह से बदल जाएगा। देशभर की अदालतें तकनीक आधारित न्यायिक प्रणाली से जुड़ जाएंगी।
शनिवार को देहरादून स्थित एफआरआई में आयोजित 49वीं आल इंडिया पुलिस साइंस कांग्रेस में केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कहा कि आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस ऐक्ट के स्थान पर लाए जा रहे तीनों कानूनों में डाक्यूमेंट समिशन, एविडेंस, वारंट, समन और जेल सुनवाई ऑनलाइन के माध्यम से होगी। इससे अदालती केस तेजी से निपटेंगे।
तीनों कानूनों में टेरेरिज्म और आर्गेनाइज्ड क्राइम के लिए कड़े प्रावधान किए जाएंगे। डायरेक्टर प्रॉसीक्यूशन के ऑफिस की क्षमता बढ़ाने के साथ ही छह साल से ज्यादा वाले केसों में फॉरेंसिक साइंस के उपयोग को अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोष सिद्धि की दर का बढ़ाने के लिए भी समयबद्धता और अन्य बदलाव किए जाएंगे।
इससे हर नागरिक को सुरक्षा मिलेगी। उन्होंने चंडीगढ़ पुलिस की तरह बीट प्रणाली को पुनर्जीवित करने, खबरी नेटवर्क को फिर बनाने की बात की। क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा अहम शाह ने कहा कि आज डिजिटल दौर में डिजिटल पब्लिक गुड्स की सुरक्षा को लेकर भी अहम कदम उठाने की जरूरत है। हम दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था हैं।