अवैध खनन मामले में हाईकोर्ट सख्त, विकासनगर थाने के पूरे स्टाफ के तबादले के दिए आदेश

उत्तराखंड में अवैध खनन को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने खनन माफिया से जुड़े एक विवादित एफआईआर मामले में राज्य सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई है। कोर्ट ने न सिर्फ FIR दर्ज करने वाले पुलिस अधिकारी के निलंबन के निर्देश दिए हैं, बल्कि विकासनगर थाने के पूरे स्टाफ के तबादले का भी आदेश दे दिए।

मामला देहरादून के विकासनगर का है। 27 फरवरी को कालसी वन प्रभाग के एसडीओ राजीव नयन नौटियाल ने यमुना नदी से आते हुए अवैध खनन साम्रगी से भरे एक डंपर को रोका। नौटियाल ने जब इस खनन के दस्तावेज मांगे तो डंपर चालक और मौके पर पहुंचे उसके साथियों ने एसडीओ और उनके साथियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि वीडियो बनाने पर एसडीओ का मोबाइल भी तोड़ दिया गया।

एसडीओ ने विकासनगर कोतवाली में इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कराई। हैरानी की बात ये है कि पुलिस ने जिस एफआईआर के आधार पर खनन माफिया की तलाश करनी थी वही खनन माफिया देर रात पुलिस थाने पहुंच गए और एसडीओ पर गाली गलौज और जाति सूचक शब्दों के इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई। यही नहीं, पुलिस ने मनीष चौहान के नाम से मिली शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज भी कर दिया।

एसडीओ राजीव नयन नौटियाल ने इसके बाद हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट में जज राकेश थपलियाल की पीठ ने इस पूरे मामले में क्रास एफआईआर लेने के खेल को पकड़ लिया। नाराज कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने वाले अधिकारी को निलंबित करने और विकासनगर कोतवाली के पूरे स्टाफ का तबादला करने के निर्देश दे दिए। कोर्ट ने इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग डीजीपी को सौंपी है।

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