उत्तराखंड में सहकारिता आंदोलन को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य में जल्द ही सहकारिता आधारित ‘भारत टैक्सी सेवा’ शुरू की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य टैक्सी चालकों को केवल चालक नहीं, बल्कि वाहन और सेवा का वास्तविक स्वामी बनाकर उन्हें आर्थिक, सामाजिक और सम्मानजनक सशक्तिकरण प्रदान करना है।
इस पहल की शुरुआत केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा देशभर में भारत टैक्सी सेवा के शुभारंभ के साथ हुई है, जिसका उद्घाटन केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में किया। उसी क्रम में उत्तराखंड सरकार ने भी राज्य में सहकारिता मॉडल पर टैक्सी सेवा लागू करने का निर्णय लिया है।
उत्तराखंड के सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि राज्य देवभूमि होने के साथ-साथ पर्यटन, तीर्थाटन और डेस्टिनेशन वेडिंग का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। चारधाम यात्रा के दौरान हर साल 50 लाख से अधिक श्रद्धालु राज्य में पहुंचते हैं, जबकि पिछले वर्ष करीब 6 करोड़ पर्यटक उत्तराखंड आए, जो अब तक का रिकॉर्ड है। ऐसे में संगठित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर टैक्सी सेवा की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है।
मंत्री ने कहा कि सहकारिता आधारित टैक्सी योजना में स्वामित्व (Swamitva), सुरक्षा (Suraksha), सामाजिक सुरक्षा कवच और सम्मान (Samman) को प्राथमिकता दी जाएगी। इस मॉडल में चालकों को बीमा, लोन और अन्य सुविधाओं से भी जोड़ा जाएगा, ताकि उनकी आय और जीवन स्तर में सुधार हो सके।
उन्होंने बताया कि अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं और जल्द ही योजना का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा। यह टैक्सी सेवा चार पहिया, तीन पहिया और दो पहिया वाहनों से जोड़ी जाएगी, जिससे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ पर्वतीय और ग्रामीण इलाकों के स्थानीय युवाओं और चालकों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
सहकारिता आधारित भारत टैक्सी सेवा से न केवल टैक्सी चालकों का आर्थिक सशक्तिकरण होगा, बल्कि यह उत्तराखंड में बढ़ते पर्यटन, चारधाम यात्रा और वेडिंग डेस्टिनेशन गतिविधियों को भी एक मजबूत सहकारी ढांचे से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी।