बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत पुनर्निर्माण का काम किया जा रहा है, लेकिन हक-हकूकधारियों का आरोप है कि बदरीनाथ धाम में पौराणिक धार्मिक शिलाओं से छेड़छाड़ की जा रही है. जिसके खिलाफ हक-हकूकधारी सड़कों पर उतरे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. साथ ही आक्रोशित लोगों ने अपना सिर मुंडवाते हुए सरकार की रीति-नीति का विरोध किया.
हक-हकूकधारियों का कहना है कि बदरीनाथ धाम की पवित्रता और धार्मिक महत्व को बनाए रखने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने होंगे. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया तो वे आगे भी विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे. उनका ये भी कहना है कि पौराणिक धार्मिक शिलाओं से छेड़छाड़ कतई ठीक नहीं है.
बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत काम कर रही कंपनी पर आरोप है कि वो पौराणिक धार्मिक शिलाओं के साथ छेड़खानी कर रही है, जिसके खिलाफ स्थानीय लोग कई दिनों से विरोध कर रहे हैं. बीती रोज यानी 18 अगस्त को विरोध प्रदर्शन करने हुए लोगों ने अपना मुंडन करवा. साथ ही सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया.
हक-हकूकधारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि बदरीनाथ धाम में पौराणिक शिलाओं पर लगातार छेड़खानी और तोड़फोड़ की जा रहा है. ऐसे में बदरीनाथ के महत्व पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है. अब लगातार लोग वहां आंदोलन कर सरकार से मांग कर रहे हैं कि जल्द ही सरकार को इस ओर ध्यान दे.
उनका कहना है कि मास्टर प्लान के तहत जो बदरीनाथ धाम में निर्माण कार्य चल रहे हैं, उससे पौराणिक महत्व विलुप्त हो रहे हैं. जो यहां की पौराणिक शैली और धार्मिक शिलाएं हैं, उन्हें लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है. जिससे वहां के लोग, व्यापारी और हक हकूकधारी खासे नाराज हैं.
हक-हकूकधारी, पंडा समाज, तीर्थ पुरोहित और स्थानीय कारोबारियों का कहना है कि मास्टर प्लान के तहत भले ही बदरीनाथ में विकास कार्य हों, लेकिन जो पौराणिक मान्यताएं हैं, वो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपने आप में महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में इन पौराणिक शिलाओं को संरक्षित किया जाए.
गौर हो कि बदरीनाथ मास्टर प्लान के तहत बदरीनाथ धाम को एक आध्यात्मिक और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केदारनाथ धाम की तर्ज पर शुरू किया गया है.
इस योजना का उद्देश्य तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाओं को बढ़ाना, धाम के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व को बनाए रखना और क्षेत्र के बुनियादी ढांचे का सतत विकास करना है. जिसे 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष मास्टर प्लान पेश किया गया था. जिसके लिए करीब 424 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है.