आज शाम तक पूरा हो जाएगा रेस्क्यू ऑपरेशन, गंगनानी में वैली ब्रिज बनना शुरू

बीती 5 अगस्त को उत्तरकाशी के धराली में खीर गंगा गाड़ ने भारी तबाही मचाई है. ऐसे में आपदा के बाद घाटी में फंसे लोगों का रेस्क्यू किया जा रहा है. पूरा सरकारी अमला उत्तरकाशी में डेरा डाले हुए है. गढ़वाल कमिश्नर, आईजी गढ़वाल समेत सभी विभागों की वरिष्ठ अधिकारी उत्तरकाशी में कैंप कर रहे हैं तो वहीं से सभी व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए लगातार युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है. इसी कड़ी में गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे से ईटीवी भारत ने बातचीत की और हालातों को लेकर अपडेट लिया.

गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन 3 कंपोनेंट पर काम कर रहा है. पहला है धराली में फंसे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को बाहर निकलने का काम, जिसे सेना और हेलीकॉप्टर के माध्यम से निकाला जा रहा है. दूसरा अहम कंपोनेंट है रिकंस्ट्रक्शन, जिसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों को दुरुस्त करना है.

बता दें कि उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से लेकर धराली तक 8 से 10 जगहों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिन्हें लगातार खोलने का काम किया जा रहा है. वहीं, इसके अलावा धराली में नेटवर्क सुविधा को बहाल करना है. इसके लिए कल ही पोर्टेबल इंटरनेट की व्यवस्था धराली में की जा रही है, जिसके लिए इक्विपमेंट वहां पर भेजे जा चुके हैं. ताकि, वहां पर इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी को बहाल किया जाएगा. अच्छी बात ये है कि आज दोपहर हर्षिल घाटी में मोबाइल नेटवर्क काम करने लगा है.

गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि गंगनानी तक सड़क मार्ग पूरी तरह से बहाल कर दिया गया है. वहां तक कनेक्टिविटी ठीक है. हालांकि, उसे और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन गंगनानी के बाद जो एक ब्रिज टूट हो गया था, वो निश्चित तौर से एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन आज सुबह जानकारी मिली है कि बीआरओ (BRO) ने वैली ब्रिज बनाने का काम शुरू कर दिया है.

उन्होंने बताया कि वैली ब्रिज को तैयार होने में 48 से 72 घंटे लगते हैं. जैसे ही यह वैली ब्रिज बन जाएगा, उसके बाद रोड कनेक्टिविटी बहाल हो जाएगी. क्योंकि, इस वैली ब्रिज से हमारी हैवी मशीनरी आगे जाएगी और जहां पर समस्याएं हैं, वहां पर सड़क को बहाल करते हुए धराली तक पहुंचा जाएगा. वहीं दूसरी तरफ से भी लगातार बीआरओ की टीम सड़क खोलने के लिए लगी हुई है.

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