1984 सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी और मुआवजा देने की मांग, उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर – Kachchichithi

1984 सिख विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों को सरकारी नौकरी और मुआवजा देने की मांग, उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर

हरिद्वार। वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में हुए सिख विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, रोजगार और मुआवजे का मुद्दा एक बार फिर उठा है। इस संबंध में हरिद्वार के भदोरिया एडवोकेट एसोसिएट की ओर से उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग, देहरादून में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में उत्तराखंड के मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव गृह, प्रमुख सचिव समाज कल्याण, प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण और पुलिस महानिदेशक को पक्षकार बनाया गया है। याचिका दायर करने वालों में अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, सुमेधा भदोरिया एडवोकेट, चेतन भदोरिया (एलएलबी अध्यनरत), शाहनवाज मलिक (एलएलबी अध्यनरत) और रेखा पांडे एडवोकेट शामिल हैं। याचिका में बताया गया है कि वर्ष 1984 की हिंसा के दौरान हजारों निर्दोष सिख नागरिकों की जान गई और अनेक परिवारों की संपत्ति, आजीविका तथा सामाजिक सुरक्षा प्रभावित हुई। उस समय उत्तराखंड का क्षेत्र उत्तर प्रदेश का हिस्सा था, इसलिए वर्तमान उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से जुड़े परिवार भी इस हिंसा से प्रभावित हुए थे।

याचिका के अनुसार, केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने 16 जनवरी 2006 को दंगा प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास पैकेज घोषित किया था। इसके तहत मृतकों के परिजनों को 3.50 लाख रुपये, घायलों को निर्धारित शर्तों के अनुसार 1.25 लाख रुपये तथा मृतकों की विधवाओं और वृद्ध माता-पिता के लिए 2,500 रुपये प्रतिमाह पेंशन का प्रावधान किया गया था। इसके अतिरिक्त 16 दिसंबर 2014 को केंद्र सरकार ने प्रत्येक पात्र मृतक के निकटतम कानूनी वारिस को पहले से निर्धारित सहायता के अतिरिक्त पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का निर्णय लिया था। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने वर्ष 2021 में उत्तराखंड समेत नौ राज्यों से 1984 के दंगों से प्रभावित परिवारों का विवरण मांगा था। इसके बावजूद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और रोजगार के संबंध में राज्य सरकार की नीति एवं वास्तविक कार्रवाई स्पष्ट नहीं हो पाई है।

याचिकाकर्ताओं ने राज्य मानवाधिकार आयोग से मांग की है कि 1984 के दंगों से प्रभावित प्रत्येक पात्र परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता के अनुसार सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएं। यदि परिवार के संबंधित पात्र सदस्य की मृत्यु हो गई हो या अधिक आयु के कारण नौकरी संभव न हो, तो परिवार के किसी अन्य पात्र सदस्य को रोजगार, कौशल प्रशिक्षण और आर्थिक पुनर्वास का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही उत्तराखंड के कितने सिख नागरिकों की दंगों में मृत्यु हुई और वर्तमान उत्तराखंड के कितने निवासी अन्य राज्यों में हुई हिंसा के शिकार बने, इसका जनपदवार एवं परिवारवार विवरण मांगा जाए। याचिका में वर्ष 2006 के पुनर्वास पैकेज, वर्ष 2014 की अतिरिक्त पांच लाख रुपये की सहायता और निर्धारित पेंशन का लाभ पात्र परिवारों को मिला या नहीं, इसकी जांच कराने की भी मांग की गई है। साथ ही प्रत्येक जनपद में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और प्रभावित सिख समुदाय के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए विशेष सत्यापन समिति गठित करने तथा वंचित परिवारों को राहत दिलाने के लिए विशेष पुनर्वास एवं भर्ती नीति तैयार करने का अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि घटना के लगभग चार दशक बाद भी प्रभावित परिवारों के रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़े मामलों का उचित समाधान होना आवश्यक है।

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