उत्तराखंड में क्षत्रिय समाज की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के सर्वेक्षण और राज्य क्षत्रिय आयोग के गठन की मांग, मानवाधिकार आयोग में याचिका

उत्तराखंड राज्य में क्षत्रिय समाज में भी बहुत से लोग जो आर्थिक रूप से कमजोर, निर्धन, बेरोजगार ,ग्रामीण ,किसान, श्रमिक और पूर्व सैनिक परिवार तथा शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों से वंचित होने पर यह सभी बातों को मध्य नजर रखते हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, सुमेधा भदोरिया एडवोकेट पत्नी श्री अनिरुद्ध प्रताप सिंह ,चेतन भदोरिया LLB अध्यनरत ने राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड देहरादून में एक याचिका मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार देहरादून, प्रमुख सचिव ,समाज कल्याण विभाग उत्तराखंड शासन देहरादून, प्रमुख सचिव, गृह विभाग उत्तराखंड शासन देहरादून के विरुद्ध धारा 12 ,13, 17 एवं 18 मानवाधिकार आयोग अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के तहत दायर की है जिसमें भदोरिया एडवोकेट एसोसिएट में अपनी याचिका में बताया है कि क्षत्रिय समाज के भी बहुत से लोग आर्थिक रूप से कमजोर, निर्धन ,बेरोजगार, किसान ,श्रमिक ,पूर्व सैनिक, परिवार हैं जो शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों से वंचित भी हो जाते हैं इसलिए केवल जाति की पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाना उचित नहीं है जिस कारण क्षत्रिय समाज के लोगों का लगातार मानवाधिकार अधिकार का उल्लंघन हो रहा है, जिसके लिए क्षत्रिय समाज की वास्तविक सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का निष्पक्ष तथ्यधारित अध्ययन किया जाना आवश्यक है.

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 2 D में मानवाधिकार से आशय, जीवन ,स्वतंत्रता, समानता एवं व्यक्ति की गरिमा से संबंधित उन अधिकारों से है जो संविधान द्वारा सुनिश्चित अथवा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार वचनों में निहित है और भारत में न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय है देश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के लिए संविधान में क्रमशः अनुच्छेद 338, 338 ए, 338 बी के अंतर्गत संवैधानिक अयोगो की व्यवस्था है भदोरिया एसोसिएट एडवोकेट ने इन आयोगो के अस्तित्व अथवा अधिकारों पर कोई प्रश्न अपनी याचिका में नहीं उठाया है और ना ही उनके अधिकारों को कम करने की मांग की है केवल और केवल क्षत्रिय समाज के संबंध में सामाजिक आर्थिक एवं मानवाधिकार संबंधी समस्याओं का तथ्यधारित अध्ययन करने के लिए एक उपयुक्त संस्थागत तंत्र की आवश्यकता की जानकारी अपनी याचिका में दी है और अपनी याचिका में माननीय आयोग से यह स्पष्ट रिपोर्ट मांगे जाने के लिए याचिका में दायर किया गया है की सन 2000 में राज्य गठन के बाद से आज तक क्षत्रिय समाज की सामाजिक, आर्थिक, एवं शैक्षिक स्थिति के संबंध में राज्य सरकार द्वारा कोई भी व्यापक सर्वेक्षण ,अध्ययन अथवा रिपोर्ट तैयार की गई है या नहीं यदि राज्य सरकार द्वारा ऐसी कोई रिपोर्ट तैयार नहीं की गई तो एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित कर राज्य क्षत्रिय आयोग के लिए आयोग से राज्य सरकार को अनुशंसा करने के लिए अपनी याचिका में लिखित में दिया है.

इसके अतिरिक्त विशेषज्ञ समिति बनाई जाए जिस में राज्य क्षत्रिय आयोग के गठन के लिए समाजशास्त्र ,अर्थशास्त्र ,विधि, शिक्षा ,रोजगार एवं मानवाधिकार के विशेषज्ञों को शामिल करने के आदेश पारित करने की मांग की गई है साथ ही राज्य क्षत्रिय आयोग के लिए उक्त स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति को उत्तराखंड राज्य के प्रत्येक जिले के तथ्य एवं आंकड़े एकत्र करने का भी दायित्व की मांग की है इसके अतिरिक्त उत्तराखंड राज्य में राज्य क्षत्रिय आयोग के गठन की अनुशंसा के लिए सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति का अध्ययन करना शिक्षा और उच्च शिक्षा में भागीदारी का अध्ययन करना रोजगार एवं बेरोजगारी संबंधी समस्याओं का अध्ययन करना कौशल ,विकास एवं सब रोजगार के संबंध में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का संकलन किया जाए ,सरकारी योजनाओं की पहुंच का अध्ययन किया जाए, मानवाधिकार संबंधी शिकायतों का तथ्यात्मक संकलन किया जाए ,संबंधित सरकारी विभागों से रिपोर्ट प्राप्त की जाए, और राज्य क्षत्रिय आयोग के लिए शोध एवं सर्वेक्षण कराया जाए और राज्य में राज्य क्षत्रिय आयोग के गठन के लिए हरिद्वार के भदोरिया एडवोकेट ने राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की है।

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