ऐतिहासिक सोमनाथ मैदान शनिवार को देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया, जब 1170 अग्निवीरों ने भव्य पासिंग आउट परेड में हिस्सा लेकर मातृभूमि की रक्षा का संकल्प लिया. “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों से पूरा मैदान गूंज उठा. करीब छह माह के कठोर और अनुशासित प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अग्निवीरों के सातवें बैच ने सेना की वर्दी पहनकर राष्ट्र सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
परेड समारोह की शुरुआत धर्म गुरुओं द्वारा अग्निवीरों को देश रक्षा की शपथ दिलाने के साथ हुई. इसके बाद जवानों ने शानदार मार्च पास्ट प्रस्तुत कर अपनी दक्षता, अनुशासन और सैन्य कौशल का प्रदर्शन किया. परेड की सलामी केआरसी कमांडेंट ब्रिगेडियर विजयंत महादिक ने ली.
प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद सभी अग्निवीर बहादुरगढ़ द्वार से कदमताल करते हुए मैदान में पहुंचे और आकर्षक परेड का प्रदर्शन किया. इस अवसर पर ब्रिगेडियर विजयंत महादिक ने अग्निवीरों और उनके परिजनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सेना में भर्ती होना गर्व और सौभाग्य की बात है.
देश सेवा का अवसर हर किसी को नहीं मिलता और जो युवा राष्ट्र रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित करते हैं, वे वास्तव में भाग्यशाली होते हैं. उन्होंने कहा कि अग्निवीरों ने अपनी पहली अग्निपरीक्षा सफलतापूर्वक पार कर ली है और अब वे हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा के लिए तैयार रहेंगे. ब्रिगेडियर महादिक ने कुमाऊं रेजिमेंट के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां प्रशिक्षित सैनिकों ने हमेशा देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. उन्होंने अग्निवीरों के अभिभावकों का भी आभार व्यक्त किया और कहा कि भारतीय सेना तथा पूरा देश उन परिवारों का ऋणी है, जिन्होंने अपने बेटों को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित किया है.
परेड के बाद अग्निवीरों में विशेष उत्साह देखने को मिला. सेना का हिस्सा बनने की खुशी उनके चेहरों पर साफ झलक रही थी. वहीं, दूर-दूर से पहुंचे परिजनों के लिए यह पल बेहद भावुक और गौरवपूर्ण रहा. अपने सपूत और भाई को सेना की वर्दी में देखकर उनके चेहरे गर्व और खुशी से खिल उठे. समारोह में डिप्टी कमांडेंट कर्नल प्रभु रामदास वामन, प्रशिक्षण बटालियन कमांडर कर्नल मोहित वर्मा, कैप्टन रोबिन, सूबेदार मेजर राजेश कुमार, सूबेदार प्रकाश चंद, पंकज कुमार, हवालदार भगत सिंह, अल्का कौशिक समेत कई सैन्य अधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद रहे. परेड के उपरांत इन अग्निवीरों को कुमाऊं और नागा रेजिमेंट की विभिन्न पलटनों में तैनाती के लिए भेजा जाएगा.