5 अगस्त को उत्तरकाशी की खीरगंगा में आए अचानक जल प्रलय के कारण गंगोत्री धाम का मुख्य पड़ाव धराली अब मलबे में तब्दील हो चुका है. जिसमें कई लोग अभी भी लापता हैं. ऐसी आपदा उत्तराखंड में पूर्व में भी आ चुकी है. 2013 की केदारनाथ आपदा और 2021 की रैणी आपदा इसके ताजा उदाहरण हैं. लेकिन सबसे ज्यादा खतरा उनके लिए हैं जो कस्बे धराली के तरह ही नदियों किनारे बसे हुए हैं.
ऐसा ही एक उदाहरण टिहरी जनपद के जौनपुर विकासखंड का थत्यूड़ बाजार है, जो कि अगलाड़ नदी के किनारे बसा है. 2013 में आई भीषण आपदा के दौरान अगलाड़ नदी ने विकराल रूप ले लिया था. जिसके कारण नदी के आस पास की कई हेक्टेयर आबाद सिंचित भूमि तबाह हो गई थी. साथ ही पैदल पुल भी बह गए थे. इसी दौरान अगलाड़ नदी में आए जल प्रलय के कारण थत्यूड़ बाजार के आवासीय भवनों के कुछ हिस्सों को अपनी जद में लिया था. जिसकी याद क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण अगलाड़ नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर से ताजा कर दी है. आलम ये है कि पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश के कारण अब अगलाड़ नदी का जलस्तर थत्यूड़ के आवासीय भवनों के करीब पहुंच गया है, जिसके कारण लोग दहशत में हैं.
स्थानीय निवासी खेमराज भट्ट, कुलवीर सिंह रावत ने जानकारी देते हुए बताया कि 2013 में उत्तराखंड में आई भीषण आपदा के दौरान पालीगाड़ और दशज्यूला क्षेत्र की कई हेक्टेयर सिचिंत भूमि अगलाड़ नदी की चपेट में आने से बह गई थी. साथ ही गंवाणा-भवान पुल, बांड़ाचक-साटागाड़ पुल, थत्यूड़ के पास भुम्या नामे तोक पर बने पुल भी बह गए थे. इसके साथ थत्यूड़ बाजार के आवासीय भवनों और 33 केवी विद्युत सबस्टेशन को भी क्षति पहुंची थी. लेकिन आपदा के 12 साल बाद भी इस पर कुछ कार्य नहीं हो पाए. स्थानीय जनता के द्वारा कई बार भवान से थत्यूड़ तक अगलाड़ नदी के किनारे बाढ़ सुरक्षा तटबंध बनाने की मांग की गई है. लेकिन आजतक इस पर कार्य शुरू नहीं हो पाया, जिसको लेकिन स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है.
अगलाड़ नदी, इस क्षेत्र की सबसे लंबी नदी है, जो कि यमुना नदी में मिलती है. अगलाड़ नदी में क्षेत्र के बड़े चुल्याणी, बिलौन्दी गदेरे के साथ कई अन्य छोटे खदेरे मिलते हैं. बरसात के दिनों में अगलाड़ नदी विकराल रूप ले लेती है. थत्यूड़ के पास अगलाड़ नदी में दो स्थानीय नदियों बेलगर, पालीगाड़ नदी भी मिलती है. इस स्थान को यहां पर त्रिवेणी भी कहा जाता है. इस स्थान पर भगवान शिव का मंदिर भी है.
इस मामले पर धनौल्टी विधायक प्रीतम सिंह पंवार ने बताया कि राज्य आपदा प्रबंधन विभाग से इसका प्रस्ताव और डीपीआर, भारत सरकार को भेजा गया है. जैसे ही स्वीकृति मिलती है, इस पर सुरक्षा तटबंध बनाने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा.