हाउसिंग प्रोजेक्टों में निवेश के लिए MDDA ने बनाया लैंडबैंक, ये बनाई योजना

इन्वेस्टर्स समिट के लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण ने भी तैयारी शुरू कर दी है। समिट में हिस्सा लेने के लिए आने वाले निवेशकों को लुभाने के लिए प्राधिकरण ने कार्ययोजना तैयार की है। खासकर प्रापर्टी के क्षेत्र में निवेश को सुनिश्चित करने के लिए एमडीडीए लैंडबैंक तैयार कर रहा है, ताकि इन्वेस्टर्स यहां पर ग्रुप हाउसिंग और अन्य आवासीय प्रोजेक्टों में निवेश कर सकें।

पिछले एक महीने में 500 बीघा से अधिक लैंड बैंक तैयार किया जा चुका है। इसे पांच से 10 हजार बीघा तक ले जाने की तैयारी है। देहरादून में सभी प्रकार के उद्योगों में निवेश नहीं किया जा सकता, वहीं प्रापर्टी में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। एमडीडीए ने इन संभावनाओं को भांपते हुए अपनी तैयारी शुरू कर दी है। एमडीडीए का मानना है कि अगर उनके पास लैंडबैंक होगा, तो प्रापर्टी के क्षेत्र में निवेश करने वालों से यहां पर इन्वेस्ट कराया जा सकेगा, लेकिन बगैर लैंडबैंक के कोई निवेश नहीं कराया जा सकता। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया, लैंडबैंक तैयार करने के लिए योजना बनाकर काम किया जा रहा है।

बताया, अब तक आठ से नौ स्थानों पर लैंडबैंक तैयार कर लिया गया है। जिले में विकासनगर, सहसपुर, किशनपुर, हर्रावाला समेत डोईवाला में लैंडबैंक तैयार किया जा रहा है। अब तक पांच सौ बीघा के करीब लैंडबैंक तैयार किया गया है। दो हजार बीघा या इससे अधिक लैंडबैंक तैयार करने की तैयारी है।

ग्रुप हाउसिंग पर एमडीडीए का अधिक फोकस

एमडीडीए का अधिक फोकस ग्रुप हाउसिंग पर है। पिछले कुछ सालों में देहरादून में ग्रुप हाउसिंग के कई प्रोजेक्ट आए, लेकिन इधर कुछ सालों से इसमें कमी आई है। एमडीडीए का मानना है कि ग्रुप हाउसिंग से शहर के विकास को गति मिलती है। ग्रुप हाउसिंग से आसपास के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं, इसलिए एमडीडीए ग्रुप हाउसिंग के लिए बड़ी कंपनियों को देहरादून में लाना चाहता है।

यहां मिल रही राहत निवेशकों को लुभाएगी

ग्रुप हाउसिंग के क्षेत्र में निवेश करने वालों के लिए देहरादून की मौजूदा परिस्थितियां अन्य शहरों की अपेक्षा बेहतर हैं, इसलिए माना जा रहा कि इस बार इन्वेस्टर्स समिट में प्रापर्टी के क्षेत्र में निवेश करने वाले यहां सभावनाएं तलाशेंगे। दरअसल, पहले देहरादून में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए न्यूनतम दो हजार वर्ग मीटर जगह अनिवार्य थी, जिसे घटाकर एक हजार वर्ग मीटर कर दिया गया है, इसलिए भी ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए बिल्डर यहां पर लैंडबैंक की तलाश करेंगे।

सर्किल रेट पर दे सकते अपनी जमीन

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया, लैंडबैंक तैयार करने के लिए सभी भूस्वामियों को आमंत्रित किया गया है, जो भी भूस्वामी अपनी जमीन एमडीडीए को देना चाहें, वे सर्किल रेट पर दे सकते हैं।

अड़चनों को किया दूर, प्रदेश में बनेंगे निजी औद्योगिक क्षेत्र

प्रदेश में नए उद्योग लगाने के लिए निवेशकों को जमीन मुहैया कराने के लिए सरकार ने निजी औद्योगिक क्षेत्र की अड़चनों को दूर किया है। निजी औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए आवेदन की प्रक्रिया सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से की जाएगी।

सरकार की मंजूरी मिलने के साथ ही निजी औद्योगिक क्षेत्र की अधिसूचना जारी की जाएगी, जबकि पहले नीति में अवस्थापना विकास कार्य पूरे करने के बाद औद्योगिक क्षेत्र अधिसूचित करने की शर्त थी। प्रदेश में नए उद्योगों के लिए सिडकुल की ओर से विकसित औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन नहीं बची है।

जमीन की कमी को देखते हुए सरकार ने निजी औद्योगिक क्षेत्र स्थापना नीति को लागू किया, लेकिन नीति में दो चरणों में स्वीकृति की प्रक्रिया होने से बिल्डर्स या कंपनियां आगे नहीं आ रहे थे, जिससे सरकार ने नीति में संशोधन किया है। अब सिंगल विंडो सिस्टम पर आवेदन के बाद राज्य प्राधिकृत समिति से मंजूरी दी जाएगी। इसके साथ जिस निजी भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाना है, उस क्षेत्र को इंडस्ट्रियल एरिया घोषित करने की अधिसूचना भी जारी की जाएगी।

इसके अलावा निजी क्षेत्र में विकसित निजी औद्योगिक क्षेत्र के लिए सरकार की ओर से 250 प्रति वर्गमीटर आधार पर प्रति एकड़ 10 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। नीति में मैदानी क्षेत्रों में निजी औद्योगिक क्षेत्र बनाने के लिए 30 एकड़ और पर्वतीय क्षेत्रों में पांच एकड़ जमीन की शर्त रखी गई है।

निवेशक सम्मेलन से 2.50 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य

सरकार की ओर से दिसंबर में वैश्विक निवेशक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन से 2.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर एमओयू करने का लक्ष्य रखा गया है। सम्मेलन से पहले सरकार ने लगभग 25 हजार करोड़ का निवेश धरातल पर उतारने की रणनीति बनाई है।

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