सचिवालय संघ के चुनाव को लेकर शासन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस कड़ी में सचिवालय प्रशासन की तरफ से निर्वाचन विभाग को पत्र भेजकर निर्वाचन अधिकारी नामित करने के लिए कहा गया है. जिससे सचिवालय संघ के चुनाव जल्द से जल्द संपन्न कराये जा सके.
दरअसल सचिवालय संघ के चुनाव हर दो वर्ष में कराए जाते हैं. इसके तहत नई कार्यकारिणी का गठन किया जाता है. इस बार चुनाव तय समय पर नहीं हो पाए थे. मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल 31 जुलाई 2025 को ही समाप्त हो चुका था. इसके बावजूद नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इस देरी को लेकर सचिवालय संघ से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों में लगातार असंतोष भी देखने को मिल रहा था.

इसी बीच सचिवालय संघ के सदस्यों ने खुद आगे आकर सचिवालय प्रशासन को पत्र लिखकर जल्द चुनाव कराने की मांग की. कर्मचारियों का कहना था कि कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद संघ के कामकाज पर भी असर पड़ रहा है. इसलिए नई टीम का गठन जरूरी है. कर्मचारियों की इस मांग के बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हुई. अब चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए औपचारिक कदम उठाए गए हैं.
सचिवालय प्रशासन की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे गए पत्र में स्पष्ट रूप से निर्वाचन अधिकारी नामित करने का अनुरोध किया गया है. निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति चुनाव प्रक्रिया का पहला और अहम चरण होता है. इसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम तय किया जाता है. जिसमें नामांकन, नाम वापसी, मतदान और मतगणना की तिथियां निर्धारित की जाती है.
हालांकि अभी तक मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है. माना जा रहा है कि जल्द ही इस संबंध में फैसला लिया जाएगा. निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति के साथ ही चुनावी प्रक्रिया तेज हो जाएगी. जैसे ही निर्वाचन अधिकारी नामित होंगे, वैसे ही सचिवालय संघ के चुनाव की तिथियों की घोषणा भी संभव है.
सचिवालय में चुनाव को लेकर माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है. कार्यकाल समाप्त होने के बाद से ही विभिन्न पदों के लिए संभावित उम्मीदवार सक्रिय हो गए हैं. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव सहित कई महत्वपूर्ण पदों के लिए अधिकारी और कर्मचारी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हुए हैं. आने वाले दिनों में यह गतिविधियां और तेज होने की संभावना है.
यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं क्योंकि सचिवालय संघ राज्य के कर्मचारियों की आवाज उठाने का एक बड़ा मंच है. संघ के माध्यम से कर्मचारियों की समस्याओं को शासन तक पहुंचाया जाता है. उनके समाधान के लिए प्रयास किए जाते हैं. ऐसे में नई कार्यकारिणी के गठन से कर्मचारियों को नई उम्मीदें भी जुड़ी हुई हैं.