मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध हिंदुस्तान के विपक्षी राजनीतिक दल जो की इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और उनके विरुद्ध विभिन्न आरोप लगाए जा रहे हैं SIR को गलत ढंग से लागू करने के आधार पर वोट काटे गए हैं आदि विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों के द्वारा आरोप लगाए गए हैं और देश में कई भागों में विरोध प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं इन सबको देखते हुए हरिद्वार के अरुण भदोरिया एडवोकेट ,कमल भदोरिया एडवोकेट, श्रीमती सुमेधा भदोरिया एडवोकेट पत्नी श्री अनिरुद्ध प्रताप सिंह, चेतन भदोरिया LLB अध्यनरत व शाहनवाज मलिक LLB अध्यनरत ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली में एक याचिका दायर की है जिसमें भारत संघ, सचिव ,विधि एवं न्याय मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली, भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली, पुलिस आयुक्त दिल्ली को विपक्षीगण बनाकर याचिका दायर की गई है अपनी याचिका में बताया है कि भारत निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत स्थापित एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है ,जिसका दायित्व देश में स्वतंत्र निष्पक्ष विश्वसनीय निर्वाचन सुनिश्चित करना है .
ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध SIR गलत ढंग से प्रस्तुत करने का आरोप लगाकर उनसे इस्तीफे की मांग की जा रही है, देश में विभिन्न जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, अत्यंत आश्चर्य की बात है किसी संवैधानिक संस्था के प्रमुख पर ऐसा दबाव, धमकी, जबरदस्ती अथवा गैर कानूनी कार्रवाई यदि जांच में प्रमाणित होती है जिससे निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित हो अथवा नागरिकों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो गंभीर मानवाधिकार एवं लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रश्न उत्पन होता है माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी कई अपने निर्णय में निर्वाचन प्रक्रिया में निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका को महत्वपूर्ण माना है, अपनी याचिका में यह भी जानकारी दी गई कि यदि किसी राजनीतिक दल को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरुद्ध कोई गंभीर शिकायत है तो उसका समाधान संविधान एवं कानून में निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए ना कि किसी गैर कानूनी दबाव अथवा धमकी के माध्यम से हो, मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324 (5) में निर्धारित है मानवाधिकार आयोग 1993 की धारा 12 के अंतर्गत मानवाधिकारों के उल्लंघन की रोकथाम में नेगलिजेंसी के मामलों की जांच कर सकता है और धारा 17 के अंतर्गत आयोग संबंधित सरकार अथवा प्राधिकारी से रिपोर्ट भी मांग सकते हैं.

इसी प्रकरण में 5 अक्टूबर 2026 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल सस्पेंड करने की मांग पर अंतरिम आदेश देने से भी इनकार कर दिया इसके बावजूद हमारे देश के विपक्षी दल अपनी इच्छा को जबरदस्ती राजनीतिक दबाव बनाकर गलत रूप से श्री ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करना व लंबी छुट्टी पर भेजने के लिए दबाव बना रहे हैं इस पूरे प्रखंड पर भदोरिया एडवोकेट एसोसिएट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष से यह भी मांग की है कि भारत सरकार एवं भारत निर्वाचन आयोग से वर्तमान विवाद तथा मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरुद्ध लगाए गए आरोप एवं उनके संबंध में अपनाई गई संवैधानिक वैधानिक प्रक्रिया की तथ्यात्मक रिपोर्ट प्राप्त करें यदि जांच में यह पाया जाए कि किसी व्यक्ति या राजनीतिक समूह के द्वारा धमकी हिंसा जबरदस्ती अथवा किसी अन्य गैर कानूनी माध्यम से मुख्य निर्वाचन आयुक्त अथवा निर्वाचन आयोग के स्वतंत्र कार्य में हस्तक्षेप किया गया .
उसके संबंध में विधि के अनुसार कार्यवाही की संस्तुति करें साथ ही निर्वाचन आयोग की संवैधानिक स्वतंत्रता तथा नागरिकों के स्वतंत्र एवं निष्पक्ष निर्वाचन संबंधी अधिकारों की रक्षा हेतु आवश्यक सिफारिश भारत सरकार को प्रेषित करें। इस याचिका के दाखिल करने से यह भी स्पष्ट है कि सन 2027 में कई राज्यों में चुनाव होना है विपक्षी दल जो की दबाव बनाकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार को हटाने की फिराक में लगे हुए थे लेकिन सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी अंतरिम आदेश ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए स्पष्ट इनकार कर दिया गया है। देखना होगा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली इस संबंध में क्या कार्रवाई करते हैं