नैनीताल स्थित वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में हुई घटना को लेकर हरिद्वार के अरुण भदौरिया एडवोकेट एवं कमल भदौरिया एडवोकेट के द्वारा उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक व आईजी कुमायूं नैनीताल को मुकदमा दर्ज किए जाने के लिए प्रार्थना पत्र भेजा गया है शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल एवं कमल मेहरा, यशपाल आर्य सहित अन्य व्यक्तियों द्वारा सामूहिक रूप से एसएसपी कार्यालय में प्रवेश किया गया तथा पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ अभद्रता, अशोभनीय एवं गाली-गलौज की भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें धमकाया गया। शिकायत में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों के वैधानिक एवं शासकीय कार्यों में जानबूझकर बाधा उत्पन्न की गई तथा कार्यालय परिसर में तनावपूर्ण एवं अव्यवस्थित स्थिति उत्पन्न की गई।
किसी पुलिस अधिकारी के कार्यालय में घुसकर अधिकारी को तलाशते हुए कार्यालय के अंदर एवं निजी स्थान तक जाना, हिंसक भाषा का प्रयोग करना, पुलिस अधिकारी को धमकाना तथा सरकारी कार्य को बाधित करना सामान्य राजनीतिक विरोध की श्रेणी में नहीं आता। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को ढूंढते हुए उनके बॉथरूम तक में घुसना जिससे स्पष्ट है कि इनका इरादा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से बात करने का नहीं बल्कि उन पर शारीरिक रूप से हमला मतलब उनकी हत्या तक करने का भी स्पष्ट उनका ही हिंसात्मक व्यवहार स्पष्ट कर रहा है शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटना के वास्तविक तथ्यों एवं घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय नैनीताल की समस्त सीसीटीवी कैमरों की मूल रिकॉर्डिंग सुरक्षित कराई जाए। विशेष रूप से घटना से 24 घंटे पूर्व एवं 24 घंटे बाद तक की सीसीटीवी फुटेज, प्रवेश द्वार से लेकर कार्यालय की गैलरी एवं घटनास्थल तक के मार्ग की फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की गई है।

इसके अतिरिक्त घटना के समय उपस्थित पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सूची, उनके मोबाइल वीडियो/अन्य उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तथा सोशल मीडिया पर उपलब्ध घटना संबंधी वीडियो को भी सुरक्षित कराए जाने की मांग की गई है, ताकि साक्ष्यों में किसी प्रकार का परिवर्तन अथवा छेड़छाड़ न हो सके। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस महानिदेशक से मांग की है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर निष्पक्ष एवं विधिसम्मत कार्रवाई किए जाने हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नैनीताल को निर्देशित किया जाए।
अधिवक्ता कमल भदौरिया ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है, लेकिन किसी सरकारी अधिकारी के कार्यालय में जाकर अभद्रता, धमकी अथवा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करना स्वीकार्य नहीं हो सकता। घटना की निष्पक्ष जांच और उपलब्ध इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना आवश्यक है, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। समस्त घटना को लेकर मुकदमा दर्ज किए जाने हेतु प्रार्थना पत्र पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड और आईजी कुमाऊं नैनीताल को भेजा गया