उत्तराखंड में 30 जुलाई को हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कुंभ क्षेत्र में अवैध खनन को देखते हुए 48 स्टोन क्रशरों को बंद करने के आदेश दिए हैं. इसके अलावा बिजली और पानी जैसे कनेक्शन भी तत्काल प्रभाव से काटने को कहा है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा है कि इस आदेश के बाद एक हफ्ते के भीतर प्रशासन ने क्या कुछ कार्रवाई की है? इसकी रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश करें. वहीं, कोर्ट के आदेश के बाद जहां खनन कारोबारी चिंता में हैं तो वहीं राज्य सरकार को भी राजस्व के घाटे का डर सता रहा है.
हरिद्वार की मातृ सदन संस्था लंबे समय से अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाती रही है. हाईकोर्ट में कुंभ क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन को लेकर मातृ सदन ने याचिका दायर की हुई है. जिसकी सुनवाई 30 जुलाई को हुई. मातृ सदन ने अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट में कहा था कि जब केंद्र सरकार ने स्वच्छ गंगा मिशन चलाया हुआ है. इसके अलावा एनजीटी समेत केंद्रीय मंत्रालय ने राज्य को निर्देशित किया है कि हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में अवैध खनन किसी भी सूरत में न हो.
गंगा के अस्तित्व को बचाने के लिए जो भी कुछ किया जा सकता है, वो करें. कोर्ट में सुनवाई के दौरान मातृ सदन ने अपना पक्ष बेहद मजबूत तरीके और सबूत के साथ रखा. जिसके बाद कोर्ट ने कड़ा फैसला लेते हुए 28 स्टोन क्रशर को पूरी तरह से बंद करने के आदेश दिए हैं. यह फैसला न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने सुनाया है.
सरकारी योजनाओं में खनन सामग्री पहुंचाने का काम करने वाले खनन से जुड़े हुए संदीप का कहना है कि उत्तराखंड में इस वक्त कई योजनाएं चल रही हैं. दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे का काम हो या फिर उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सड़क बनाने का काम. कई जगहों पर फ्लाईओवर भी तैयार हो रहे हैं.
ऐसे में जितनी भी सरकार की बड़ी योजनाएं चल रही हैं, उस पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा. क्योंकि, अब माल जब यहां से उठेगा नहीं तो पड़ोसी राज्यों से माल लेना होगा. सरकारी योजनाओं को आप एक दिन के लिए भी बंद नहीं कर सकते हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के राजस्व में इस फैसले के बाद बढ़ोतरी होगी.