हिंदुस्तान देश जो 15 अगस्त सन 1947 को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ लेकिन आज की पीढ़ी उस आजादी में हुई प्रताड़ित व क्रूरता को पूरी तरह से भूल चुके हैं ,गुलामी के समय में बनाए गए कानून से आज भी हम न्यायालय में मुकदमे लड़ रहे हैं इसलिए स्पष्ट नहीं होता कि हम किस तरह से अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुए हैं ।
इन सब बातों को देखते हुए हरिद्वार के अरुण को भदोरिया एडवोकेट, कमल भदोरिया एडवोकेट, सुमेधा भदोरिया एडवोकेट, श्रीमती रेखा पांडे एडवोकेट, चेतन भदोरिया LLB अध्यनरत, शाहनवाज मलिक LLB अध्यनरत ने राज्य मानवाधिकार आयोग उत्तराखंड देहरादून में एक याचिका प्रमुख सचिव गृह विभाग उत्तराखंड शासन देहरादून, प्रमुख सचिव संस्कृति विभाग उत्तराखंड शासन देहरादून, पुलिस महानिदेशक उत्तराखंड देहरादून को पक्ष कार बनाते हुए दाखिल की है जिसमें यह मांग की है कि अंग्रेजो के द्वारा बनाए गए समस्त कानून को हटाया जाए, नए कानून वर्तमान हालात को देखते हुए बनाने के लिए विपक्षिगण को निर्देशित किया जाए ,संबंधित नए कानून विद्वानों से एवं नागरिक समाज से परामर्श लेकर नए कानून बनाए जाएं, गृह विभाग व न्याय विभाग से इस विषय पर उनका पक्ष तथा उपलब्ध कानून नीति संबंधी जानकारी प्राप्त करने पर विचार किया जाए ।अपनी याचिका में भदोरिया एसोसिएट ग्रुप ने बताया की अंग्रेजों के समय में सबसे अधिक फांसी ब्राह्मणों को दी गई, काला पानी की सजा सबसे अधिक ब्राह्मणों को दी गई, सबसे ज्यादा गोलियों से ब्राह्मणों को भुना गया, इसका मुख्य कारण यह था कि अंग्रेज जो कि ब्राह्मणों से अत्यधिक डरते थे, साथ ही अत्यधिक नफ़रत करते थे।

जब मंगल पांडे महान क्रांतिकारी ने सन 1857 में क्रांति की शुरुआत की तब भी अंग्रेजों ने जानकारी की की यह क्रांति करने वाला व्यक्ति कौन है,तो उन्हें मंगल पांडे महान क्रांतिकारी के साथ-साथ यह भी पता चला कि इस क्रांति में मठ मंदिर के पुजारी ने भी भाग लिया तो इस कारण अंग्रेजों की नफरत ब्राह्मणों के प्रति और बढ़ गई तो अंग्रेजों ने मठ मंदिर को वापस लेने के लिए एक सन 1857 में लॉ कमीशन बनाया और उसका अध्यक्ष लार्ड मैकाले को बनाया गया मैकाले ने कहा कि यदि हिंदुस्तान को गुलाम बनाए रखना है तो एक कानून बनाया जाए तब मैकाले ने सन 1860 में एक कानून इंडियन पेनल कोड बनाया, कानून तो बन गया लेकिन फिर एक समस्या उत्पन्न हुई कि ब्राह्मणों को कौन मारेगा, कौन पिटेगा तो फिर पुलिस एक्ट 1861 बनाया गया लेकिन अंग्रेज तो हिंदुस्तान से भाग गए लेकिन उक्त कानून आज भी हमारे हिंदुस्तान में प्रत्येक राज्य में विराजमान है अभी तक नहीं बदला गया, इसके बाद अंग्रेजों ने कहा कि हिंदुस्तानियों के मठ मंदिरों पर कंट्रोल करना जरूरी है क्योंकि सभी क्रांति मठ मंदिर से ही शुरू होती है तब अंग्रेजों ने सन 1863 में मठ मंदिरों को कंट्रोल करने वाला इंडोमेट एक्ट बनाया फिर उसके बाद अंग्रेजों ने न्यायालय की स्थापना की ,जिसमें विशेष रूप से ब्राह्मणों को काला पानी की सजा दिए जाने के लिए सन 1872 में एविडेंस एक्ट भी बनाया और इन न्यायालय में जज अंग्रेज ,वकील अंग्रेज, स्टाफ अंग्रेज, और भाषा भी अंग्रेजी थी इसलिए सभी हिंदुस्तानियों की अंग्रेजी नहीं जानते थे जिस कारण हिंदुस्तान वासी अपना पक्ष और दलील सही ना रख पाने के कारण सजा पाए चले गए, 50% से ज्यादा ब्राह्मणों को फांसी ,काला पानी, गोलियों से भून गया, मठ मंदिर के पुजारी को ही ज्यादा भुना गया। इसके बाद अंग्रेजों ने हिंदुस्तान वासियों को प्रताड़ित करने के लिए सन 1894 में लैंड एक्विजिशन एक्ट बनाया जिसके लिए हिंदुस्तान वासियों को जमीन 99 वर्ष के लिए लीज पर दी गई और वर्तमान में 99 वर्ष पूरे हो जाने के पश्चात भी उक्त जमीन आज तक वापस नहीं लिया गया इसके बाद अंग्रेजों ने हिंदुस्तान वासियों को ही अधिक प्रताड़ित करने के लिए सन 1927 में एक फॉरेस्ट एक्ट बनाया इसके लिए बड़े-बड़े जंगलों में चर्च, मिशनरियां बना दी गई नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम इनके बड़े-बड़े जंगलों में अंग्रेजों के द्वारा चर्च मिशन बनाये गई और जंगलों में इन्हें जगह दी गई । 1878 में आर्म्स एक्ट अंग्रेजों ने हिंदुस्तान वासियों को और अधिक प्रताड़ित करने के लिए बनाया लेकिन सन 1958 में जो जवाहरलाल नेहरू ने आर्म्स एक्ट में कुछ बदलाव किया।
पुलिस एक्ट 1861 में भी कुछ बदलाव उत्तराखंड राज्य में संशोधन हुआ भारत की केंद्रीय सरकार द्वारा आईपीसी को बदलाव करते हुए नया नाम BNS दिया गया और कुछ धाराओं में बदलाव किया लेकिन बाकी सभी कानून हमारे देश में अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए को आज भी इस एक्ट में चले हुए हैं जो अंग्रेजों ने बनाए थे वर्तमान में हिंदुस्तान वासियों में जो अत्यधिक कानून के जानकार और वर्तमान के हालात को देखते हुए गुलामी के एक्ट को बदले जाने के लिए यह याचिका राज्य मानवाधिकार आयोग में दायर की गई है ।