उत्तराखंड महिला आयोग में 10 नए पदों के सृजन को मंजूरी, मानदेय वृद्धि पर भी बड़ा फैसला

उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष 2026–27 की पहली बोर्ड बैठक संपन्न हुई. महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, निदेशालय में हुई बैठक के दौरान महिला सुरक्षा, अधिकार संरक्षण, जनजागरुकता, आयोग की कार्यप्रणाली के सुदृढ़ीकरण और आगामी वर्ष की व्यापक कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया. साथ ही अयोग में 10 नए पदों को सृजन करने के साथ ही तमाम महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सहमति बनी.

बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा उत्तराखंड सरकार महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलम्बन और गरिमामय जीवन सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है. राज्य महिला आयोग भी इसी भावना के साथ सरकार एवं प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रही है. वर्तमान, समय में उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की कार्यशैली के प्रति महिलाओं का विश्वास भी लगातार बढ़ रहा है.

प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय, ग्रामीण एवं सीमांत क्षेत्रों से भी महिलाएं अपनी शिकायतें और प्रार्थना-पत्र लेकर आयोग तक पहुंचा रही हैं. शिकायतों की बढ़ती संख्या इस बात को बयां कर रही हैं कि महिलाएं आयोग को न्याय एवं संरक्षण का विश्वसनीय मंच मान रही हैं. उन्होंने कहा कि प्रत्येक पीड़ित महिला को समयबद्ध सहायता, विधिक परामर्श और न्याय दिलाना आयोग की पहली प्राथमिकता है. राज्य महिला आयोग में बढ़ते कार्यभार एवं महिलाओं की अपेक्षाओं को देखते हुए बोर्ड बैठक में आयोग के लिए 10 नए पदों के सृजन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया.

इसके साथ ही बोर्ड बैठक के दौरान आयोग के सदस्यगण के मानदेय में वृद्धि किए जाने के प्रस्ताव पारित किया गया. स्वच्छता कर्मी के वेतन वृद्धि का भी प्रस्ताव पारित किया गया. यही नहीं, बैठक में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में आयोग की सक्रिय उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आयोग की तीनों उपाध्यक्षों को जिलावार दायित्व सौंपा गया है. जिसके तहत उपाध्यक्ष ऐश्वर्या रावत को पौड़ी, टिहरी और रुद्रप्रयाग जिले की जिम्मेदारी दी गई है। उपाध्यक्ष चन्द्रकला तिवारी को उत्तरकाशी और चमोली जिले की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, उपाध्यक्ष शायरा बानो को ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई.

आयोग की अध्यक्ष ने कहा आयोग के सभी सदस्यगण अपने-अपने जिलों में नियमित जनसुनवाई, महिला जागरुकता कार्यक्रम, वन स्टॉप सेंटर निरीक्षण और महिला अधिकार संरक्षण से जुड़े कामों का संचालन करेंगे. बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि उपाध्यक्ष और सदस्यगण निर्धारित जिलों में वन स्टॉप सेंटर में नियमित जनसुनवाई में प्रतिभाग करेंगी. साथ ही स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर महिला अधिकार संरक्षण के कामों को गति देंगी. बैठक के दौरान वन स्टॉप सेंटर, नारी निकेतन, महिला हेल्प डेस्क, साइबर अपराध से जुड़े मामलों तथा विधिक जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।.

महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कहा कि महिला आयोग की वास्तविक सफलता तब होगी, जब उत्तराखंड की अंतिम पंक्ति में बैठी मातृशक्ति, सीमांत क्षेत्र की बेटी और दूरस्थ गांव की महिला भी ये विश्वास करे कि राज्य महिला आयोग उसके साथ खड़ी है.

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